मानव तस्करी के शक में कस्टडी में लिए मदरसे के बच्चों को लेकर राज्यपाल को सोपा ज्ञापन
भोपाल :असंवैधानिक तरीक़े से बिना ठोस प्रमाण के मानव तस्करी की झूठी शिकायत पर अररिया बिहार से महाराष्ट्र लातूर के मदरसे अपनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए जा रहे बच्चों को तत्काल छोड़कर बच्चों को अपने-अपने परिजनों को सुरक्षित एवं स्वस्थ सौंपने का आदेश अति आवश्यक तौर पर जबलपुर एवं कटनी आर.पी.ऍफ़, जी.आर.पी तथा CWC को देने बाबत ज्ञापन।
महोदय, उपरोक्त विषयांतर्गत आपको अवगत कराया जा रहा हे कि विगत दिनांक 11 अप्रैल2026 शनिवार को सायं 6:30 बजे झूठी एवं ग़लत जानकारी के चलते हुए मध्य प्रदेश के ज़िला कटनी के रेलवे स्टेशन जंक्शन पर पटना पुणे एक्सप्रेस क्रमांक 17609 के स्लीपर कोच नम्बर दो, तीन, चार इत्यादि से उक्त पुलिस द्वारा लगभग 167 मुस्लिम बच्चों को जिनकी आयु 6, 7 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक है उन्हें तथा उनके साथ उनके आठ अध्यापकों को मानव तस्करी के झूठे आरोप के नाम पर कटनी स्टेशन पर उतार लिया गया, प्राकृतिक न्याय एवं कार्यवाही एवं बिना किसी विवेचना को पूर्ण किए बिना ही बिना किसी साक्ष्य जुटाए उनके खिलाफ़ FIR दर्ज करली गई और तुरंत आधे बच्चे कटनी तथा आधे बच्चे जबलपुर के CWC में भेज दिए गए जो न्याय हित में बिल्कुल भी उचित नहीं है।
मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद को यह भी जानकारी प्राप्त हुई हे कि CWC अररिया के किसी शंभू रजत ने कटनी के CWC के सदस्य दुर्गेश को ग़लत जानकारी देकर मानव तस्करी की शंका बताई बल्कि उससे पूर्व शंभू रजत ने इन बच्चों को डिटेन करने के लिए पटना, मिर्ज़ापुर और सतना स्टेशन की पुलिस को भी ग़लत जानकारी देने की कोशिश की थी परंतु उक्त स्टेशनों पर इन बच्चों के संबंध में सब कुछ सही जानते हुए पुलिस अधिकारियों ने आगे के लिए यात्रा होने दी, जबकि कटनी में इन बच्चों को मानव तस्करी के नाम पर जबरदस्ती उतार लिया गया, यहां यह बात भी स्पष्ट है कि कुल 167 बच्चों में कोई भी बच्चा बिना टिकट नहीं पाया गया और वह सब आरक्षित कोच में अपने परिजनों की सहमति से अपनी शिक्षा प्राप्त करने के उदेश से यात्रा कर रहे थे।
परिषद यह भी कहना चाहती हे कि क़ानून यह कहता हे कि शंका एवं संदेह के आधार पर पकड़े जाने घर वालों को 24 घंटे के अंदर सूचना देना पुलिस का कर्तव्य हे तत्पश्चात ही तस्दीक होने पर उन पर कार्यवाही करना अथवा न करना सुनिश्चित होता है, लेकिन यहां इस बात को पूरी तरह नज़र अंदाज़ कर दिया गया।
यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि आज 10 वें दिन तक भी CWC बिना किसी कारण सिर्फ़ और सिर्फ़ जांच के नाम पर बच्चों को रोके हुआ हे जबकि अधिकांश बच्चों के अभिभावक/परिजन स्वयं आकर अपने बच्चों को लातूर महाराष्ट्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए मदरसे भेजने की तस्दीक शपथ पत्र/अंडरटेकिंग के माध्यम से कर चुके हैं, इतना ही नहीं अररिया एवं सुपौल की अधिकांश ग्राम पंचायत के प्रमुखों ने CWC को प्रमाण पत्र भेजकर इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि यह स्थानीय बच्चे महाराष्ट्र में लातूर ज़िले के मदरसे में शिक्षा ग्रहण करने जा रहे थे।
मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद का यह स्पष्ट कहना हे कि इस पूरे मामले में क़ानून की पूरी तरह अनदेखी की गई है तथा पूर्वाग्रह से ग्रस्त इन बच्चों को जो अपने बेहतर भविष्य को लेकर अपनी शिक्षा के लिए मदरसे पढ़ने जा रहे थे उन्हें तथा उनके ग़रीब अभिभावकों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया जो मानव अधिकारों का, संवैधानिक अधिकारों एवं बच्चों के सुख अधिकारों का सीधा-सीधा उल्लंघन है, परिषद मांग करती है कि आर.पी.ऍफ़ एवं जी.आर.पी के पुलिस अधिकारियों द्वारा असंवैधानिक कार्यवाही के लिए आपके विभाग द्वारा उनसे जवाब तलब किया जाय तथा CWC अररिया के शंभू रजत व कटनी के दुर्गेश के खिलाफ़ सख़्त कानूनी कार्यवाही जाए जिन्होंने षडयंत्र कर 167 बच्चों के भविष्य एवं उनकी शिक्षा एवं उनकी आज़ादी के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है व उन बच्चों को तत्काल छोड़ने के न केवल आदेश दिए जाएं, उन्हें उनके परिजनों/अभिभावकों तक सुरक्षित एवं स्वस्थ पहुंचाने की भी पूर्ण रूप से सम्पूर्ण व्यवस्था की जाए।

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