कुदरत का कहर: महाराष्ट्र के कई जिलों में प्री-मानसून बारिश से हाहाकार, अन्नदाता बेहाल और 3 की गई जान
मुंबई | महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से मौसम के मिजाज में लगातार बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां कुछ इलाके भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्री-मानसून की तेज बारिश, ओलावृष्टि और चक्रवाती हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून ने केरल के तट पर दस्तक दे दी है, लेकिन महाराष्ट्र तक इसके पहुंचने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। हालांकि, इस आधिकारिक आगमन से पहले ही राज्य के कई जिलों में अंधड़ और आकाशीय बिजली गिरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और खेती-किसानी को करारा झटका लगा है।
परभणी और बीड में आकाशीय बिजली का कहर, हादसों में मासूम की मौत
परभणी जिले में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश और तेज आंधी के कारण एक मकान की दीवार ढह गई, जिसकी चपेट में आने से ग्यारह वर्षीय मासूम दीपाली नंदगे की दर्दनाक मौत हो गई। इसी जिले के गंगाखेड तालुका अंतर्गत गौंडगांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक काश्तकार के गाय और बैल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अंधड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मकानों के छप्पर उड़ गए और रेलवे स्टेशन का टिन शेड उखड़कर बिजली के हाईटेंशन तारों पर जा गिरा। दूसरी ओर, बीड जिले के आष्टी तालुका में अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने बागवानी करने वाले किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिससे केले और जामुन के बड़े-बड़े बगीचे पूरी तरह उजड़ गए।
बुलढाणा और सोलापुर में चक्रवाती तूफान से बागान तबाह, बुजुर्ग दंपति ने गंवाई जान
बुलढाणा जिले के शेगांव, संग्रामपुर और खामगांव इलाकों में आए चक्रवाती तूफान और बारिश ने हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में लहलहा रहे केले और संतरे के बागों को मटियामेट कर दिया। कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गईं। इसी तरह का खौफनाक मंजर सोलापुर के करमाला तालुका में भी देखने को मिला, जहां सैकड़ों एकड़ में फैले केले के पौधे उखड़ गए। सोलापुर के ही पोमलवाड़ी गांव में एक और दर्दनाक हादसा हुआ, जहां घर की दीवार धराशायी होने से मलबे में दबकर वृद्ध दंपति जगन्नाथ नवले और शालन नवले की जान चली गई।
मुआवजे की आस में पीड़ित किसान, प्रशासन ने शुरू किया सर्वेक्षण
मौसम के इस दोहरे वार ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। बेमौसम हुई इस तबाही से जहां फलदार पौधों और बागानों को स्थायी नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी फसलें भी मिट्टी में मिल गईं, जिससे किसानों की लाखों रुपये की गाढ़ी कमाई पानी में बह गई। कई क्षेत्रों में मवेशियों के हताहत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका लगा है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित गांवों और खेतों में जाकर नुकसान का पंचनामा (आकलन) करना शुरू कर दिया है, ताकि रिपोर्ट तैयार की जा सके। वहीं, पाई-पाई को मोहताज हो चुके पीड़ित किसान सरकार से जल्द से जल्द विशेष आर्थिक पैकेज और उचित मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।

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