तरनतारन में सरकारी योजना में फर्जीवाड़ा, 62 लाभार्थियों के लिए इस्तेमाल हुआ एक बैंक अकाउंट
तरनतारन। पंजाब में पहली जुलाई से शुरू हुई मांवां धीयां सत्कार योजना के पंजीकरण के दौरान तरनतारन जिले के चोहला साहिब ब्लाक में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। सरकारी दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि खडूर साहिब हलके की 62 अलग-अलग महिलाओं के पंजीकरण फॉर्म में एक ही बैंक खाता संख्या दर्ज की गई थी। गहराई से की गई जांच में यह बात सामने आई कि यह बैंक खाता किसी भी महिला लाभार्थी का नहीं था, बल्कि इसे संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के बेटे के नाम पर खोला गया था ताकि सरकारी राशि का सीधे गबन किया जा सके।
योजना के पंजीकरण में गंभीर धांधली
इस बड़े फर्जीवाड़े की खबर सामने आते ही संबंधित विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और उसके बेटे के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती विवरण के अनुसार, गांव भैल ढाए वाला में तैनात आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जतिंदर कौर की ड्यूटी अन्य विभागीय कर्मचारियों की तरह ही इस योजना के अंतर्गत योग्य महिलाओं का ऑनलाइन पंजीकरण करने के लिए लगाई गई थी, जिसका उसने गलत फायदा उठाया।
एक ही बैंक खाते का खेल
इस पूरी साजिश को बहुत ही शातिराना ढंग से अंजाम दिया गया था, जहां दर्जनों जरूरतमंद महिलाओं के हक को मारकर सरकारी पैसे को एक ही जगह ट्रांसफर करने की योजना थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने अपनी ड्यूटी का दुरुपयोग करते हुए सभी पात्र महिलाओं के दस्तावेजों के साथ चालाकी से अपने ही बेटे का बैंक अकाउंट नंबर लिंक कर दिया ताकि सरकार की तरफ से मिलने वाली वित्तीय सहायता सीधे उनके निजी खाते में पहुंच सके। हालांकि, विभाग की मुस्तैद वेरिफिकेशन टीम ने समय रहते इस विसंगति को पकड़ लिया और पैसे ट्रांसफर होने से पहले ही इस पूरे खेल को बिगाड़ दिया।
प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई
इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि योजना के तहत अब तक हुए सभी पंजीकरणों की दोबारा से बारीकी से जांच की जाए। पुलिस ने आरोपी मां और बेटे के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए मामले की तफ्तीश तेज कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में विभाग का कोई अन्य कर्मचारी तो शामिल नहीं था। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की धोखाधड़ी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।

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