तीस्ता-पद्मा नदी पर बैराज निर्माण की तैयारी, बांग्लादेश ने किया ऐलान
ढाका: बांग्लादेश ने अपने देश में गहराते जल संकट को दूर करने और खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता और पद्मा नदी पर काफी समय से लंबित बैराज परियोजनाओं (मेगा प्रोजेक्ट्स) के निर्माण का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और बीएनपी (BNP) चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका के पास गाजीपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए यह साफ कर दिया कि उनकी सरकार इन दोनों बड़ी जल परियोजनाओं पर बहुत जल्द काम शुरू करने जा रही है।
फंडिंग के लिए चीन का दौरा और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का सहारा
इस अरबों डॉलर के मेगा प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए बांग्लादेश पूरी तरह चीन पर भरोसा कर रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान जून के आखिरी हफ्ते में चीन के बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर जाने वाले हैं, जहां बीजिंग में इस बैराज परियोजना की फंडिंग (आर्थिक मदद) को लेकर चीनी नेतृत्व के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने खुद बीजिंग जाकर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है और इस करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक रूप से मदद मांगी है। बांग्लादेश इस पूरे प्रोजेक्ट को चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।
भारत के फरक्का बैराज पर आरोप और गंगा जल संधि की समयसीमा
जनसभा को संबोधित करते हुए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने देश के जल संकट के लिए पड़ोसी देश भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि भारत के फरक्का बैराज के कारण सूखे के दिनों में बांग्लादेश को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे दक्षिणी इलाकों में समुद्र का खारा पानी घुस रहा है और सुंदरबन के पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि मॉनसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने और सूखे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने के लिए बांग्लादेश को यह बैराज बनाना ही होगा। गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में हुई ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा संधि की मियाद इसी साल दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, जबकि तीस्ता जल समझौता पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण साल 2011 से ही अधर में लटका हुआ है।
चिकन नेक के पास चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की रणनीतिक चिंताएं
बांग्लादेश के इस फैसले और इस जल परियोजना में चीन की सीधी एंट्री ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में रणनीतिक और सुरक्षा गलियारों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि तीस्ता नदी का यह पूरा इलाका भारत के सबसे संवेदनशील 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है) के बेहद करीब है। यह बेहद संकरा जमीनी रास्ता भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (नॉर्थ-ईस्ट) को बाकी पूरे देश से जोड़ता है। इस बड़े प्रोजेक्ट के बहाने चीनी कंपनियों, चीनी सैनिकों और इंजीनियरों की इस संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। इसके साथ ही, बांग्लादेश का चीन की तरफ तेजी से बढ़ता यह झुकाव इस पूरे क्षेत्र में भारत के कूटनीतिक और राजनीतिक प्रभाव के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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