LIC को मिल सकती है हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हिस्सेदारी, डील के लिए बातचीत जारी
देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी LIC जल्द ही हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में एंट्री करने जा रही है। इंश्योरेंस सेक्टर की दिग्गज सरकारी कंपनी एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। एलआईसी के मुख्य कार्यकारी सिद्धार्थ मोहंती ने मंगलवार को कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के साथ चल रही बातचीत अंतिम चरण में है और उम्मीद है कि 31 मार्च से पहले डील की अंतिम रूप से घोषणा हो जाएगी। सिद्धार्थ मोहंती ने हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का नाम नहीं बताया, जिसमें एलआईसी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है।
हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस में आना एलआईसी के लिए स्वाभाविक विकल्प
बताते चलें कि देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में भी कदम रखने की संभावनाएं तलाश रही है। एलआईसी के मुखिया ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, ‘‘स्वास्थ्य बीमा कारोबार में शामिल होना एलआईसी के लिए स्वाभाविक विकल्प है और चर्चा अंतिम चरण में है।’’
4000 करोड़ रुपये में इस कंपनी में हिस्सेदारी खरीद सकता है LIC
सिद्धार्थ मोहंती ने कहा कि एलआईसी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में 51 प्रतिशत या उससे ज्यादा की नियंत्रक हिस्सेदारी नहीं खरीदेगी। खरीदी जाने वाली हिस्सेदारी की सटीक मात्रा एलआईसी के निदेशक मंडल के फैसले और मूल्यांकन जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी 4000 करोड़ रुपये के डील में मणिपाल सिग्ना कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है।
मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए कंपनी के शेयर
मंगलवार को एलआईसी के शेयर बीएसई पर 12.65 रुपये (1.70%) की तेजी के साथ 757.65 रुपये के भाव पर बंद हुए। हालांकि, कंपनी के शेयर अभी भी अपने 52 वीक हाई से काफी नीचे और 52 वीक लो के करीब कारोबार कर रहे हैं। एलआईसी के शेयरों का 52 वीक हाई 1221.50 रुपये और 52 वीक लो 715.35 रुपये है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 4,79,213.45 करोड़ रुपये है।

Kerala में सियासी हलचल, बागी सुधाकरण ने Rahul Gandhi संग साझा किया मंच
Mamata Banerjee का बड़ा दावा, 2026 में गिर सकती है मोदी सरकार
Katni में पुलिस का बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन, वारंटी और बदमाश गिरफ्तार
नई दिल्ली से देहरादून का सफर अब होगा सुपरफास्ट
राघव चड्ढा को लेकर सियासी तूफान, क्या छोड़ेंगे AAP?