मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स की ऊंची छलांग; दिग्गजों को पीछे छोड़ छोटे शेयर निकले आगे
नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव कम होने की आहट और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए 'संजीवनी' का काम किया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत शुरू होने की संभावनाओं ने निवेशकों के डर को कम किया, जिससे दलाल स्ट्रीट पर लिवाली का माहौल बना रहा। भारतीय मुद्रा में आई मजबूती ने भी बाजार की इस बढ़त को सहारा दिया।
मिडकैप और सेक्टोरल चमक
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, यह सप्ताह पूरी तरह खरीदारों के नाम रहा। जहाँ आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया, वहीं धातु , एफएमसीजी (FMCG) और ऊर्जा क्षेत्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3% तक की मजबूती दिखाई। बड़े सूचकांकों के मुकाबले मंझली और छोटी कंपनियों (मिडकैप व स्मॉलकैप) के शेयरों में अधिक चमक रही, जिनमें करीब 1.5% का उछाल दर्ज किया गया।
जानकारों का नजरिया
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह रिकवरी भले ही क्रमिक है, लेकिन काफी ठोस है। विशेषज्ञ पोनमुडी आर के अनुसार, बाजार में अब भारी उतार-चढ़ाव की जगह स्थिरता दिख रही है। निवेशकों ने हर गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि बाजार का 'मूड' सकारात्मक हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ अभी भी एक बड़े और निर्णायक उछाल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
निवेश का प्रवाह: विदेशी निवेशकों की घर वापसी
बाजार के लिए सबसे सुखद संकेत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) का बदला हुआ रुख रहा। पिछले कई सत्रों से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशकों ने हफ्ते के आखिरी दिनों में शुद्ध खरीदारी की। दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस बढ़त का लाभ उठाते हुए भारी मुनाफावसूली की और लगभग 6,300 करोड़ रुपये की निकासी की। कुल मिलाकर, बाजार वर्तमान में "वेट एंड वॉच" की स्थिति में है, जहाँ वैश्विक सुधारों ने तेजी की नई उम्मीदें जगा दी हैं।

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