भारत में पेट्रोल पंप की संख्या 1 लाख पार
नई दिल्ली। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फ्यूल रिटेल मार्केट बन गया है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर अंत तक देश में पेट्रोल पंप की संख्या 1,00,266 पहुंच गई है।
पेट्रोल पंप नेटवर्क के मामले में भारत अब अमेरिका और चीन से पीछे है। राजमार्गों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकारी और निजी कंपनियों ने पिछले एक दशक में अपना नेटवर्क करीब दोगुना कर लिया है। दुनिया में सबसे बड़ा पेट्रोल पंप नेटवर्क अमेरिका का है। अमेरिका में पेट्रोल पंप की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में खुदरा पेट्रोल पंप की संख्या 1,96,643 थी। तब से कुछ पंप बंद हो चुके होंगे। वहीं, पिछले साल एक रिपोर्ट में चीन में पेट्रोल पंप की संख्या 1,15,228 बताई गई थी। चीन की कंपनी चाइना पेट्रोकेमिकल कॉरपोरेशन (सिनोपेक) 30,000 से ज्यादा पंपों के साथ वहां की सबसे बड़ी रिटेलर है, लेकिन भारत की आईओसी का नेटवर्क (41,664 पंप) सिनोपेक से भी कहीं बड़ा है।
10 साल में पेट्रोल पंपों की संख्या दोगुना हुई
देश में पेट्रोल पंपों का नेटवर्क बहुत तेजी से बढ़ा है। साल 2015 में भारत में कुल 50,451 पेट्रोल पंप थे, जो अब 2025 के अंत तक बढक़र 1 लाख से ज्यादा हो गए हैं। इस विस्तार में सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियों ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। निजी कंपनियों का मार्केट शेयर 2015 में सिर्फ 5.9 प्रतिशत था, जो अब बढक़र 9.3 प्रतिशत हो गया है। भारतीय फ्यूल मार्केट पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का एक छत्र राज है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों के पास देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। आंकड़ों के अनुसार, इंडियन ऑयल 41,664 पेट्रोल पंप के साथ देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसके बाद बीपीसीएल के 24,605 और एचपीसीएली के 24,418 स्टेशन देशभर में मौजूद हैं।

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